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भैंसो में गर्भ जांच

भैंसो में गर्भ की जांच का मुख्य उद्देश्य यह है कि कृत्रिम गर्भाधान या प्राकृतिक संभोग के बाद कम से कम समय में यह आश्वस्त होना है कि हमारी भैंसे गर्भधारण  किया है  अथवा नहीं। यदि गर्भधारण  हुआ है तो यह कितने दिन का है तथा भ्रूण की क्या स्थिति है। यदि गर्भधारण  नहीं हुआ है तो इसके कारणों की जानकारियां भी जल्द से जल्द पता लगाने में सहायता मिलती है, जो किसानों को आर्थिक क्षति से बचाता है। जैसा कि हम जानते हैं कि औरतों में मूत्र की जाँच से गर्भधारण  का पता चल जाता है। दुर्भाग्यवश, भैसों में इस तरह की कोर्इ शर्तिया जाँच नहीं है। साधारणतया  भैंसों में गर्भधारण के 7-8 महीनों के बाद बाहर से देखकर किसान बता देते हैं कि भैंस गाभिन है कि नहीं। लेकिन हमारा उद्देश्य है कि गर्भधारण का पता शुरू के 40-60 दिन में लग जाए तो ये किसानों के हित में होगा। भैंसों में गर्भधारण की जाँच बहुत सी विधियों से की जाती है जिनमें प्रमुख है :

·        बाह्य परीक्षण (External examination)

·        गुदा मार्ग द्वारा परीक्षण (Per-rectal examination),

·        खून तथा दूध में प्रोजेस्टेरोन का स्तर,

·        अल्ट्रासाउंड विधि इत्यादि।

 
 
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